bhutah Hospital ke khofnaak raste se gujrana pda bhari -horror stories ( www.hindikahani4u.com )

bhutah Hospital ke khofnaak raste se gujrana pda bhari -horror stories , kids horror stories , Hindi ghost kahani , moral kahani , ghost Hindi of India , ghost stories in Hindi
Horror stories 

bhutah Hospital ke khofnaak raste se gujrana pda bhari -horror stories ( www.hindikahani4u.com )

                  आज जो मै आपको किस्सा बताने जा रहा हु वो हमारे कस्बे के भूतहा अस्पताल का है | सारे कस्बे के लोग इस अस्पताल को भूतहा अस्पताल कहते है | इस अस्पताल का असली नाम विक्टोरिया अस्पताल है | इस अस्पताल को आज से करीबन 100 साल पहले अंग्रेजो ने बनवाया था | उस अस्पताल के सामने एक कब्रिस्तान है |

                     मेरे दादाजी ने मुझे बताया था कि आज से 60 साल पहले इस अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान एक लडकी की मौत हो गयी थी | तब से उस लडकी की आत्मा उस अस्पताल में भटकती है | रात ढलते ही कोई भी इन्सान उस रास्ते से नहीं गुजरता है क्यूंकि उस लडकी की आत्मा राहगीरों को परेशान करती है | हालंकि मै दादाजी की बताई पुरानी भूतहा कहानियों में ज्यादा विश्वास नहीं करता था |

                 एक रात मै अपने दो दोस्तों अंकित और राजू के साथ रात को बाइक पर घूम रहा था तभी मेरे एक दोस्त ने मुझसे विक्टोरिया अस्पताल वाले रास्ते से चलने को कहा | हम में से कोई भी ज्यादा भूत प्रेतों पर विश्वास नहीं करते थे और हमने उस रास्ते से जाने का पक्का किया |                                                      उस समय रात के 10 बज चुके थे | हम तीनो ने ये बात अपने परिवार वालो को नहीं बताने का वादा किया और उस रास्ते पर निकल पड़े | जैसे ही हम उस रास्ते से निकले रास्ते पर रेत होने की वजह से हमारी बाइक फिसल गयी और हम तीनो धडाम से बाइक से दूर गिर गए |                                                           गनीमत थी कि हम लोगो को कोई चोट नहीं आयी थी |बाइक चला रहे मेरे दोस्त अंकित ने बोला कि उसका बैलेंस तो बराबर था फिर ये बाइक कैसे फिसल गयी | हालंकि वो थोडा डर गया था तो मेरे दुसरे मित्र राजू ने बाइक चलाने को कहा |

                 अब राजू बाइक चला रहा था | हम 1 किमी ही चले थे कि अचानक हमारी गाडी का टायर पंचर हो गया और गाडी की स्पीड तेज़ होने से गाडी इस बार फिर पिछली बार से भी दूर तक फिसलती गयी | इस बार हमे कोहनियों और घुटनों पर थोड़ी चोट आयी थी | अंकित फिर से बोला कि इस जगह में जरुर कोई गडबड है हम लोग वापस उल्टे चलते है | लेकिन मैंने और राजू ने उसकी बात नहीं मानी और बाइक उठाकर पैदल चलना शुरू कर दिया|

                   हम थोड़ी दूर ही चले थे कि अचानक किसी लडकी के चीखने की आवाज़े सुनाई दी | ये सुनकर हम रुक गए और अंकित बोला “यार तुम लोगो को चीखने की आवाज़ सुनाई दी क्या ??” हमने उसकी बातो को अनसुना कर कहा कि कोई जानवर की आवाज़ होगी |                                                                पांच मिनट चलने के बाद फिर वोही चीख फिर से सुनाई दी | इस बार तो हम दोनों को भी थोडा डर लगने लगा | हम तीनो ने वापस चलने के बारे में सोचा लेकिन हम रास्ते के बीच में आ गये थे | पीछे चलने में 3 किमी और आगे चलने में 2 किमि ओर बाकी थे | हम लोगो ने आगे जाने का सोचा |

                 थोडा आगे चलने पर हमे बरगद के पेड़ के नीचे एक औरत दिखाई दी | इतनी रात को अकेली औरत को देखकर हमारे तो रौंगटे खड़े हो गये थे | हम लोगो ने पीछे मुड़ने का सोचा | तभी वो बुढी औरत चिल्लाई “बेटा रुको मुझे हाईवे तक का रास्ता बता दो ” |                                                                            हमने पूछा कि “इतनी रात को आप इस रास्ते से कैसे निकल रही हो “| तो उस बुढिया ने कहा कि “मै पड़ोस के गाँव की रहने वाली और मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए मै पैदल ही निकल पडी , हाईवे के उस पार मेरा गाँव है ” | हमने उस बुढिया की बात का विश्वास कर लिया और आगे निकल पड़े  |                                                                                    रास्ते में वो बुढिया हमसे सारी बाते पूछने लगी | बुढिया हम तीनो के पीछे चल रही थी हम तीनो दोस्त अब अपनी बात कर रहे थे | तभी राजू बोला कि ” लो मांजी आपका रास्ता आ गया ” और वो जैसे ही पीछे मुड़ा तो वहा कोई नहीं था |                             हम तीनो की तो सिट्टी पिट्टी गुल हो गयी | हम बाइक को धक्का मारते हुए जोर से भागने लगे | भागते भागते अंकित ठोकर खाकर गिर गया और हमे जोर से चीखे सुनाई दी |हमने भी बाइक को वही पटककर अंकित को साथ लेकर दौड़ने लगे और अस्पताल के पास कब्रिस्तान तक पहुच गए |

                  ये सब घटित होते 12 बज चुकी थी | हम पसीने से तर बतर हो गए थे और कब्रिस्तान पार कर एक मंदिर में रुक गए क्यूंकि अगर बिना बाइक के घर जाते तो जूते पड़ते |                                                          इसलिए उस रात मंदिर में ही रुक गए और सुबह होते ही बाइक लेकर अपने अपने घर आ गये और घर वालो दोस्त के यहा रुकने का बहाना बना दिया | उस रात के बाद से हम उस रास्ते से कभी नहीं गए | मुझे आज भी सपनों में वो भूतिया बुढिया और चीखने की आवाज़े आती है |

और पढ़े 
bhutah Hospital ke khofnaak raste se gujrana pda bhari -horror stories ( www.hindikahani4u.com ) bhutah Hospital ke khofnaak raste se gujrana pda bhari -horror stories ( www.hindikahani4u.com ) Reviewed by Deepak kanojia on January 18, 2020 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.