2006 Noida serieal murders story part -2

एक वरिष्ट पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया की पंधेर के लुधिअना के फार्महाउस और आस पास के इलाकों में भी तलाशी ली जायेगी | पंधेर के निवास स्थान चंडीगढ़ के बच्चों के अपहरण से जुड़े केसों को खुलवाया गया पर कुछ ख़ास जानकारी हासिल नहीं हुई |
अगले दिन मिली हुई १७ कंकालों में से १५ की पहचान कर ली गयी | दस की पहचान कोली ने खुद की जब उसे गुमशुदा बच्चों की तसवीरें दिखाई गयीं | पांच और को उनके परिवार जनों ने वहां से मिले सामन को देख पहचान लिया | इन शवों के धड गायब थे और जांच करने वाली समिति ने अंग वयापार को भी एक उद्देश्य मान तहकीकात शुरू की | पुलिस ने बताया की कम से कम ३१ बच्चे थे |
पंधेर के निवास के पास दो दिन हुई हिंसा के बाद पुलिस ने और हिंसा के डर से सुरक्षा बड़ा दी | एक प्रेस विज्ञप्ती में भारत के चीफ जस्टिस वाय के सभरवाल ने कहा की जांच शुरुआती दौर में थी और न तो कोर्ट और न ही सी बी आई इसमें शामिल  थे |
केंद्र सरकार ने एक एक उच्च  जांच समिति बनाई जो पुलिस की जांच के दौरान हुई गलतियों का मुआयना करेगी | उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव ने कहा की वह समिति की रपोर्ट का इंतज़ार करेंगे और फिर फैसला करेंगे की क्या इस केस में सी बी आई जांच होनी चाहिए | समिती की प्रमुख थी संयुक्त सचिव, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, मंजुला कृष्णन | संदर्भ की शर्तों के तहत,
  • ये समिति लापता हुए बच्चों का पता लगाने में नोएडा पुलिस द्वारा किए गए प्रयासों का जायजा लेगी ।
  • यह लापता बच्चों का पता लगाने और उनके परिवारों के साथ उन्हें एकजुट करने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गयी सहयोग और सहायता के स्तर का विश्लेषण करेगी ।
  • वह कातिलों के मारने के तरीके और उद्देश्य का आंकलन करेगी |
समिती ने पीड़ितों के माँ बाप से उनका बयान लेने के लिए मुलाक़ात की , इसी बीच पुलिस ने बताया की १७ मरने वालों में से १० लड़कियां थीं | उनमें से योन शोषण से पीड़ित 8 बच्चों के माँ बाप को 12 लाख का मुआवजा दिया गया | अवशेषों से मिले डीएनए सैंपल को हैदराबाद की फॉरेंसिक लैब में पहचान के लिए भेजा गया और कुछ फॉरेंसिक सैंपल को आगरा में एक लेबोरेटरी में उम्र , मौत का कारण और अन्य जानकारी पाने के लिए भेजा गया | ये पता चला की सिर्फ पायल किशोर थी और बाकी ११ पीड़ित १० साल से कम उम्र के थे | आठ में से सात परिवार जिन्हें ३ जनवरी २००७ को २ लाख का मुआवजा दिया गया ने विरोध में चेक वापस कर दी | लेकिन ये चेक उन्हें वापस लौटा दिए गए | उन्होनें मुआवज़े में घर और नौकरी की मांग भी की थी |
काफी  दबाव और सार्वजनिक गुस्से से जूझने  के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस के दो अधीक्षकों को निलंबित कर दिया और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के लिए छह पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया । इसके पीछे से वो समिती की रिपोर्ट भी सामने आ गयी | १७ जनवरी २००७ को जांच समिति ने लापता व्यक्तियों के मामलों से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस को गंभीर रूप से  लापरवाह मान कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की । समिती ने कहा की स्थानीय प्रशासन लापरवाह और गैर ज़िम्मेदार थी और उन्होंने अंग व्यापर के उद्देश्य को भी इन हत्याओं का एक संभावित कारण माना |
दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में थे जब पंधेर के घर के आसपास से अवशेष और कंकाल निकाले जा रहे थे | ७ अक्टूबर २००६ को ऍफ़ आई आर फाइल की गयी | जांच से पता चला की पायल का मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल में हैं जबकि उसका सिम कार्ड निष्क्रिय था | डिजिटल निगरानी के माध्यम से, जांचकर्ता काफी लोगों तक पहुंचे और अंत में उस आदमी तक भी जिसने फ़ोन बेचा था | उस रिक्शा चलाने वाले ने माना की फ़ोन पंधेर निवास से किसी का है | गवाह के बयान के बाद मोनिंदर सिंह को पूछताछ के लिए बुलाया गया जिससे कुछ सामने नहीं आया | उसके नौकर सुरिंदर कोली को अगले दिन पकड़ा गया और उसने औरत को मार उसके शरीर को घर के पीछे दफ़नाने की बात को माना | पुलिस ने खुदाई शुरू की और पायल के बजे बाकी बच्चों के कंकाल हाथ लगे |
पायल उर्फ़ दीपिका के पिता नन्दलाल ने इलज़ाम लगाया की पुलिस उसे डरा धमका रही है | उसने कहा की कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने ऍफ़ आई आर फाइल की थी |
अंग व्यापार और नरभक्षण का शक
शुरुआत में पुलिस ने अंग व्यापार को एक  सम्भावना मान पास में रहने वाले एक डॉक्टर को शक के घेरे में लिया और उससे पूछताछ की | फोरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम , अधिकारियों की एक टीम के साथ परीक्षण और संभव सबूत लाने के  लिए चले गए । पुलिस ने माना की उस  डॉक्टर पर १९९८ में ऐसा इलज़ाम लगा था लेकिन उसी साल उसको बरी कर दिया गया था | कुछ दिनों बाद एक बार फिर तलाशी ली गयी | पुलिस लेकिन पॉलीग्राफ टेस्ट से पहले ही उन ख़बरों से चौकन्नी हो गयी  की अभियुक्त नरभक्षक थे | वे तब भौचक्के रह गए जब एक आरोपी ने कुछ पीड़ितों के लिवर और अन्य अंग खाने की बात स्वीकारी | ऐसी सम्भावना जांच समिति ये जान कर की कितने वहशीपन से बच्चों को मारा गया था ख़ारिज नहीं की थी |
ब्रेन मैपिंग और नार्को विश्लेषण
दोनों अभियुक्तों को टेस्ट के लिए फोरेंसिक विज्ञान निदेशालय, गांधीनगर लाया गया | ४ जनवरी को ब्रेन मैपिंग टेस्ट और उसके पांच दिन बाद नार्को एनालिसिस किया गया | पुलिस निदेशक ने बताया की दोनों अभियुक्तों ने टेस्ट के दौरान अपना पूरा सहयोग दिया था | संस्थान के एक वरिष्ठ निदेशक ने व्यापक परीक्षण के समापन की घोषणा की और निश्कर्ष के बारे में बताया | सुरेंदर कोली ने अपने गुनाह कबूल लिए थे और अपने मालिक को इन सब से बेदखल कर दिया था | उसने बताया की सब क़त्ल गला घोट के किये गए थे | उसके बाद वो उनका बलात्कार करता और फिर अपने शौचालय में उन्हें ले जाके काट देता था | पंधेर को भी परेशान और औरतों में अत्यधिक रूचि लेने वाला माना गया |
2006 Noida serieal murders story part -2 2006 Noida serieal murders story part -2 Reviewed by Deepak kanojia on December 19, 2019 Rating: 5

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